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उम्मीद - ग़ालिब
उम्मीद - ग़ालिब

कोई उम्मीद बर नहीं आती ! कोई सूरत नज़र नहीं आती !! मौत का एक दिन मुअय्यन है ! नींद क्यों रात भर नह...

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दर्द - ग़ालिब
दर्द - ग़ालिब

दिले नादां तुझे हुआ क्या है ? आखिर इस दर्द कि दवा क्या है  ? हम है मुश्ताक और वो बेजार ! या इलाही य...

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वो शाम जैसे किसी से बिछड के रोयी थी - बशीर बद्र
वो शाम जैसे किसी से बिछड के रोयी थी - बशीर बद्र

हर इक चिराग कि लो ऐसी सोई-सोई थी वो शाम जैसे किसी से बिछड के रोयी थी नहा गया थे मै कल जुगनुओ कि ब...

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मुझे सुकून घने जंगलो में मिलता है - बशीर बद्र
मुझे सुकून घने जंगलो में मिलता है - बशीर बद्र

गजल को माँ कि तरह बावकार करता हू मै ममता के कटोरों में दूध भरता हू ये देख हिज्र तेरा कितना खुबसूर...

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अपनी उदास धुप तो घर-घर चली गयी - बशीर बद्र
अपनी उदास धुप तो घर-घर चली गयी - बशीर बद्र

अपनी उदास धुप तो घर-घर चली गयी ये रौशनी लकीर के बाहर चली गयी नीला-सफ़ेद कोट-जमीं पर बिछा दिया फिर ...

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इस बरस बागों में गुलाब कहा - बशीर बद्र
इस बरस बागों में गुलाब कहा - बशीर बद्र

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अनोखा प्यार - मीना कुमारी
अनोखा प्यार - मीना कुमारी

जब चाहा इकरार किया, जब चाहा इनकार किया देखो, हमने खुद ही से, कैसा अनोखा प्यार किया ऐसा अनोखा, ऐसा ...

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कारवा गुजर गया, गुबार देखते रहे  - गोपालदास नीरज
कारवा गुजर गया, गुबार देखते रहे - गोपालदास नीरज

स्वप्न भरे फूल से, मीत चुभे शूल से, लुट गए सिंगार सभी बाग़ के बाबुल से, और हम खड़े-खड़े बहार देख...

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कुछ कम है  -  शहरयार
कुछ कम है - शहरयार

जिन्दगी जैसी तवक्को थी नहीं, कुछ कम है हर घडी होता है अहसास कही कुछ कम है घर कि तामीर तस्सवुर ही ...

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दोस्त बनकर भी नहीं साथ निभानेवाला - अहमद फ़राज़
दोस्त बनकर भी नहीं साथ निभानेवाला - अहमद फ़राज़

दोस्त बनकर भी नहीं साथ निभानेवाला वही अंदाज है जालिम का जमानेवाला तेरे होते हुए आ जाती थी सार...

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तेरे इश्क की इन्तहा चाहता हु - इक़बाल
तेरे इश्क की इन्तहा चाहता हु - इक़बाल

तेरे इश्क की इन्तहा चाहता हु मिरी सादगी देख क्या चाहता हु सितम हो की हो वादा-ऐ-बेहिजाबी कोई बात सब्...

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मौत क्या इतनी खुबसूरत है - मीना कुमारी
मौत क्या इतनी खुबसूरत है - मीना कुमारी

कोई चाहत है न जरुरत है मौत क्या इतनी खुबसूरत है मौत कि गोद मिल रही हो अगर जागे रहने कि क्या जरुर...

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हर शख्श कि किस्मत में ईनाम नहीं होता - मीना कुमारी
हर शख्श कि किस्मत में ईनाम नहीं होता - मीना कुमारी

आगाज तो होता है, अंजाम नहीं होता जब मेरी कहानी में वह नाम नहीं होता जब जुल्फ कि कालिख में गुम हो ...

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तुम चली जाओगी, परछाईया रह जायेगी - साहिर लुधियानवी
तुम चली जाओगी, परछाईया रह जायेगी - साहिर लुधियानवी

तुम चली जाओगी, परछाईया रह जायेगी कुछ न कुछ हुस्न कि रानाइया रह जायेगी तुम तो इस झील के साहिल पे ...

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कटेगा देखिये दिन जाने किस अजब के साथ - शहरयार
कटेगा देखिये दिन जाने किस अजब के साथ - शहरयार

कटेगा देखिये दिन जाने किस अजब के साथ की आज धुप नहीं निकली आफ़ताब के साथ तो फिर बताओ समुन्दर सदा को...

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यु कभी-कभी तो नजारा करेंगे हम - मीना कुमारी
यु कभी-कभी तो नजारा करेंगे हम - मीना कुमारी

यु कभी-कभी तो नजारा करेंगे हम पहना करो नकाब, उतारा करेंगे हम महताब कि जबी पे पसीने को देखना जब न...

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ये काफिले यादो के कही खो गए होते - शहरयार
ये काफिले यादो के कही खो गए होते - शहरयार

ये काफिले यादो के कही खो गए होते इक पल भी अगर भूल से हम सो गए होते ऐ शहर तीर नामो-निशा भी नहीं होता...

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चैन दिल को रात भर आता न था - शहरयार
चैन दिल को रात भर आता न था - शहरयार

शाम तक जब कोई घर आता न था चैन दिल को रात भर आता न था बंद रखते अपनी आँखे हम सभी चाँद जब तक बाम पर...

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हिज्र कि लम्बी रात का खौफ निकल जाये - शहरयार
हिज्र कि लम्बी रात का खौफ निकल जाये - शहरयार

हिज्र कि लम्बी रात का खौफ निकल जाये आँखों पर फिर नींद का जादू चल जाये बड़ी भयानक साअत आने वाली है...

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समझौता कोई ख्वाब के बदले नहीं होगा - शहरयार
समझौता कोई ख्वाब के बदले नहीं होगा - शहरयार

जो चाहती है दुनिया वो मुझसे नहीं होगा समझौता कोई ख्वाब के बदले नहीं होगा अब रात कि दिवार को ढाना ...

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आइनों को तोड़ कर पछताओगे - शहरयार
आइनों को तोड़ कर पछताओगे - शहरयार

हर तरफ अपने को बिखरा पाओगे आइनों को तोड़ कर पछताओगे जब बदी के फुल महकेंगे यहाँ नेकियो पर अपनी...

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शोला था जल बुझा हु, हवाए मुझे न दो - अहमद फ़राज़
शोला था जल बुझा हु, हवाए मुझे न दो - अहमद फ़राज़

शोला था जल बुझा हु, हवाए मुझे न दो मै कब का जा चुका हु, सदाए मुझे न दो जो जहर पी चुका हु तुम्ही ...

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धुप हु, साया-ए-दीदार से डर जाता हु - जाजिब कुरैशी
धुप हु, साया-ए-दीदार से डर जाता हु - जाजिब कुरैशी

धुप हु, साया-ए-दीदार से डर जाता हु तुझसे मिलता हु तो कुछ और बिखर जाता हु सहिलो पर मुझे आवाज न देन...

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जो होता है सह लेते है कैसे है बेचारे लोग - जावेद अख्तर
जो होता है सह लेते है कैसे है बेचारे लोग - जावेद अख्तर

दुःख के जंगल में फिरते है कब से मारे-मारे लोग जो होता है सह लेते है कैसे है बेचारे लोग जीवन-जीवन ह...

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वो मुझसे जीत भी सकता था जाने क्यों हारा -  जावेद अख्तर
वो मुझसे जीत भी सकता था जाने क्यों हारा - जावेद अख्तर

मै पा न सका कभी इस खलिश से छुटकारा वो मुझसे जीत भी सकता था जाने क्यों हारा बरस के खुल गए आसू निथर ग...

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जिसे निगाह मिली उसे इंतजार मिला - निदा फाजली
जिसे निगाह मिली उसे इंतजार मिला - निदा फाजली

जहानतो को कहा कब्र से फरार मिला जिसे निगाह मिली उसे इंतजार मिला वो कोई रह का पत्त्थर हो या हसी मंजर...

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गम होते है तो जहानत होती है - जावेद अख्तर
गम होते है तो जहानत होती है - जावेद अख्तर

गम होते है तो जहानत होती है दुनिया में हर शय की कीमत होती है अक्सर वो कहते है वो बस मेरे है अ...

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ख्वाब के गाँव में पले है हम  - जावेद अख्तर
ख्वाब के गाँव में पले है हम - जावेद अख्तर

ख्वाब के गाँव में पले है हम पानी चलनी में ले चले है हम छाछ फुके कि अपने बचपन में  दूध से किस तरह जल...

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सुना है कल रात से वो बस्ती भी जल रही है- जावेद अख्तर
सुना है कल रात से वो बस्ती भी जल रही है- जावेद अख्तर

Taken By Devendra Gehlod  At Ratnagiri वो ढल रहा है तो ये भी रंगत बदल रही है जमीं सूरज कि उंगल...

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मिटटी - निदा फाजली
मिटटी - निदा फाजली

आओ कही से थोड़ी सी मिटटी भर लाए मिटटी को बादल में गुंधे नए नए आकर बनाए किसी के सर पर चुटिया रख दे...

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यहाँ भी वहा भी - निदा फाजली
यहाँ भी वहा भी - निदा फाजली

इन्सान में हैवान यहाँ भी है वहा भी अल्लाह निगहबान यहाँ भी है वहा भी खूखार दरिंदो के फकत नाम अलग ह...

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थोड़ी सी कमी रह जाती है - निदा फाजली
थोड़ी सी कमी रह जाती है - निदा फाजली

हर कविता मुकम्मल  होती है लेकिन वो कलम से कागज पर जब आती है थोड़ी सी कमी रह जाती है हर प्रीत मु...

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हमारे शौक कि ये इंतहा थी - जावेद अख्तर
हमारे शौक कि ये इंतहा थी - जावेद अख्तर

हमारे शौक कि ये इंतहा थी कदम रक्खा कि मंजिल रास्ता थी कभी जो ख्वाब था, वो पा लिया है मगर जो ख...

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जिन्दगी अपनी किताबो में छुपाकर ले जाए - बशीर बद्र
जिन्दगी अपनी किताबो में छुपाकर ले जाए - बशीर बद्र

खवाब इन आँखों से अब कोई चुराकर ले जाए कब्र के सूखे हुए फुल उठाकर ले जाए मुन्तजिर फुल में खुशबु कि...

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मेरी कागज कि कश्ती में कई जुगनू भी होते है - बशीर बद्र
मेरी कागज कि कश्ती में कई जुगनू भी होते है - बशीर बद्र

गुलाबो कि तरह दिल अपना शबनम में भिगोते है मुह्हबत करने वाले खुबसूरत लोग होते है किसी ने जिस तरह ...

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खेल ख़त्म हुआ किश्तिया डुबोने का - शहरयार
खेल ख़त्म हुआ किश्तिया डुबोने का - शहरयार

सभी को गम है समुन्दर के खुश्क होने का कि खेल ख़त्म हुआ किश्तिया डुबोने का बढ़ाना जिस्म बगुलों का ...

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बात बनाये न बने -ग़ालिब
बात बनाये न बने -ग़ालिब
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मै इस उम्मीद पे डूबा की तू बचा लेगा - वसीम बेरलवी
मै इस उम्मीद पे डूबा की तू बचा लेगा - वसीम बेरलवी

मै इस उम्मीद पे डूबा की तू बचा लेगा अब इसके बाद मेरा इम्तिहान क्या लेगा ये एक मेला है वादा किसी ...

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ये जो है हुक्म, मेरे पास न आए कोई- दाग देहलवी
ये जो है हुक्म, मेरे पास न आए कोई- दाग देहलवी

ये जो है हुक्म, मेरे पास न आए कोई, इसलिए रूठ रहे है की मनाए कोई ये न पूछो की गेम-हिज्र में कैसी ग...

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गज़ब है सच को सच नहीं कहते वो - दुष्यंत कुमार
गज़ब है सच को सच नहीं कहते वो - दुष्यंत कुमार

परिंदे अब भी पर तोले हुए है हवा में सनसनी घोले हुए है तुम्ही कमजोर पड़ते जा रहे हो तुम्हारे ख्वा...

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हम कुछ ऐसे तेरे दीदार में खो जाते है  - मुनव्वर राणा
हम कुछ ऐसे तेरे दीदार में खो जाते है - मुनव्वर राणा

हम कुछ ऐसे तेरे दीदार में खो जाते है जैसे बच्चे भरे बाज़ार में खो जाते है मुस्तकिल जूझना यादो से ...

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जाने कितनी उड़ान बाकी है- राजेश रेड्डी
जाने कितनी उड़ान बाकी है- राजेश रेड्डी

जाने कितनी उड़ान बाकी है ! इस परिंदे में जान बाकी है !! जितनी बाटनी थी,बट चुकी ये जमी ! अब तो बस...

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जिन्दगी तुने लहू ले के दिया कुछ भी नहीं - राजेश रेड्डी
जिन्दगी तुने लहू ले के दिया कुछ भी नहीं - राजेश रेड्डी

जिन्दगी तुने लहू ले के दिया कुछ भी नहीं ! तेरे दामन में मेरे वास्ते क्या कुछ भी नहीं !! आप इन हाथ...

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में जिन्दा हु- साहिर लुधियानवी
में जिन्दा हु- साहिर लुधियानवी

में जिन्दा हु यह मुश्तहर कीजिये ! मेरे कातिलो को खबर कीजिये !! जमी सख्त है, आसमा दूर है ! बसर हो सके तो बसर कीजिये !! सितम के बहुत से ...

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फ़ज़ा - जां निसार अख्तर
फ़ज़ा - जां निसार अख्तर

चौक चौक उठती है महलों की फिजा रात गए कौन देता है ये गलियों में सदा रात गए ये हकाइक की चट्टानों से ...

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अब किस उम्मीद पे दरवाजे से झाके कोई - परवीन शाकिर
अब किस उम्मीद पे दरवाजे से झाके कोई - परवीन शाकिर

अक्से-खुशबु हु, बिखरने से न रोए कोई, और बिखर जाऊ तो मुझको न समेटे कोई ! काँप उठती हु मै यह सोचकर तन...

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साहिल - गुलज़ार
साहिल - गुलज़ार
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काबू - दाग देहलवी
काबू - दाग देहलवी

तुम्हारा दिल मेरे दिल के बराबर हो नहीं सकता वह शीशा हो नहीं सकता यह पत्थर हो नहीं सकता कभी नासेह की सुन लेता हु फिर बरसो तडपता हु कभी होता ...

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बेसन की सोंधी रोटी पर खट्टी चटनी जैसी माँ - निदा फाजली
बेसन की सोंधी रोटी पर खट्टी चटनी जैसी माँ - निदा फाजली

बेसन की सोंधी रोटी पर खट्टी चटनी जैसी माँ याद आती है चोका बासन, चिमटा फुकनी जैसी माँ चीड़ो की चाहकर में गूंजे राधामोहन अली अली मुर्गे की आ...

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कागज - शहरयार
कागज - शहरयार

ऐ मुसाफिरे-तन्हा, शाम होने वाली है जल्द लौट के घर जा, शाम होने वाली है बैठने लगे आकर क्या परिंदे शाखों पर देख रक्स पेड़ो का, शाम हो...

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ये जीने की कैसी सजा दी गई- शाहिदा हसन
ये जीने की कैसी सजा दी गई- शाहिदा हसन

ये जीने की कैसी सजा दी गई हवाओ के रुख पर उड़ा दी गई किसी पैरहन पर मुन्नकश हुई किसी आईने में सजा दी गई किसी जिन्दगी से जुदा करके मै क...

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माँ दुआ करती हुई ख्वाब में आ जाती है - मुनव्वर राणा
माँ दुआ करती हुई ख्वाब में आ जाती है - मुनव्वर राणा

जब भी कश्ती मेरी सैलाब में आ जाती है माँ दुआ करती हुई ख्वाब में आ जाती है ये ऐसा कर्ज है की जो में अदा कर ही नहीं सकता में जब तक घर न ...

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परिचय - इक़बाल
परिचय - इक़बाल

हजरत अल्लामा सर शेख मोहम्मद "इक़बाल 09, नवम्बर, 1877 ई. को सियालकोट में पैदा हुए. वह कश्मीरी ब...

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परिचय -दाग देहलवी
परिचय -दाग देहलवी

दाग देहलवी जिनका वास्तविक नाम नवाब मिर्ज़ा खां था का जन्म २५ मई, १८३१ को दिल्ली में हुआ | जब दाग़ पाँच-छह वर्ष के थे तभी इनके पिता मर गए। इनक...

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