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ये कुचे, ये नीलमघर दिलकशी के,
ये लुटते हुए करवा जिन्दगी के,
कहा है, कहा है मुहाफ़िज़ खुदी के
सना ख्वाने तक्दिसे मशरिक कहा है ???
ये पुरपेच गलिय, ये बेख्वाब बाज़ार
ये गुमनाम राही, ये सिक्को कि झंकार
ये अस्मत के सौदे, ये सौदों पे तकरार 
सना ख्वाने तक्दिसे मशरिक कहा है ???
ये सदियों से बेख्वाब सहमी सी गलिया
ये मसली हुई अधखिली ज़र्द कलिया
ये बिकती हुई खोखली रंगरलिया
सना ख्वाने तक्दिसे मशरिक कहा है ???
ये गूंजे हुए कहकहे रास्तो पर 
ये चारो तरफ भीड़-सी खिडकियों पर
ये आवाज़ खिचती हुई आचलो पर
सना ख्वाने तक्दिसे मशरिक कहा है ???
ये फूलो के गजरे, ये पिको के छीटे
ये बेबाक नज़रे, ये गुस्ताख फिकरे
ये ढलके बदन और मद्कुक चेहरे 
सना ख्वाने तक्दिसे मशरिक कहा है ???
ये भूखी निगाहे हसीनो कि जानिब 
ये बढते हुए हाथ सीनों कि जानिब
लपकते हुए हाथ जीनो कि जानिब
सना ख्वाने तक्दिसे मशरिक कहा है ???
यहाँ पीर भी आ चुके है, जवा भी
तनोमंद बेटे भी, अब्बा मिया भी
ये बीबी है और बहन भी है , माँ भी
सना ख्वाने तक्दिसे मशरिक कहा है ???
मदद चाहती है ये हटवा को बेटी 
यशोदा कि हमजीस, राधा कि बेटी

पयम्बर कि उम्मत, जुलेखा कि बेटी
सना ख्वाने तक्दिसे मशरिक कहा है ???
जरा मुल्क के रहबरों को बुलाओ 
ये कुचे, ये गलिया, ये मंज़र दिखाओ
सना ख्वाने तक्दिसे मशरिक को लाओ
सना ख्वाने तक्दिसे मशरिक कहा है ???
                                   फिल्म प्यासा (गुरुदत्त) में ये गजल ली गई है

टुकड़े-टुकड़े दिन बिता, धज्जी-धज्जी रात मिली
जिसका जितना आचल था, उतनी ही सौगात मिली

रिमझिम-रिमझिम बूंदों में, जहर भी है और अम्रत भी
आँखे हस दी, दिल रोया, यह अच्छी बरसात मिली

जब चाह दिल को समझे, हसने की आवाज सुनी
जैसे कोई कहता हो, ले फिर तुझको मात मिली

माते कैसी, धाते क्या, चलते रहना आठ पहर
दिल सा साथी जब पाया, बैचैनी भी साथ मिली

होठो तक आते-आते, जाने कितने रूप भरे
जलती-बुझती आँखों में सादा-सी जो बात मिली -मीना कुमारी

Roman

Tukde-tukde din bita, dhajji-dhajji raat mili
jiska jitna aachal tha, utni hi sougat mili

rimjhim-rimjhim bundo me, jahar bhi hai aur amrut bhi
aankhe has di, dil roya, yah achchi barsat mili

jab chah dil ko samjhe, hasne ki awaj suni
jaise koi kahta ho, le fir tujhko maat mili

maate kaisi, ghhate kya, chalte rahna aath pahar
dil sa sathi jab paya, baicheni bhi saath mili

hotho tak aate-jate, jane kitne roop bhare
jalti-bujhti aankho me sada-si jo baat mili- Meena Kumari
यहाँ हर शख्स हर पल , हादसा होने से डरता है
खिलौना है जो मिटटी का फ़ना होने से डरता है

मेरे दिल के किसी कोने में, एक मासूम सा बच्चा
बड़ो कि देख कर दुनिया, बड़ा होने से डरता है

बहुत मुश्किल नहीं है, आईने के सामने जाना
हमारा दिल मगर क्यों, सामना होने से डरता है

न बस में जिन्दगी इसके, न कबी मौत पर इसका
मगर इन्सान फिर भी कब, खुदा होने से डरता है

अजब यह जिन्दगी कि कैद है, दुनिया का हर इंसा
रिहाई मांगता है और, रिहा होने से डरता है
                                                        -राजेश रेड्डी