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ये कुचे, ये गलिया - साहिर लुधियानवी
ये कुचे, ये गलिया - साहिर लुधियानवी

ये कुचे, ये नीलमघर दिलकशी के, ये लुटते हुए करवा जिन्दगी के, कहा है, कहा है मुहाफ़िज़ खुदी के सन...

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टुकड़े-टुकड़े दिन बिता, धज्जी-धज्जी रात मिली  - मीना कुमारी
टुकड़े-टुकड़े दिन बिता, धज्जी-धज्जी रात मिली - मीना कुमारी

टुकड़े-टुकड़े दिन बिता, धज्जी-धज्जी रात मिली जिसका जितना आचल था, उतनी ही सौगात मिली रिमझिम-रिमझि...

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रिहाई मांगता है और, रिहा होने से डरता है  -  राजेश रेड्डी
रिहाई मांगता है और, रिहा होने से डरता है - राजेश रेड्डी

यहाँ हर शख्स हर पल , हादसा होने से डरता है खिलौना है जो मिटटी का फ़ना होने से डरता है मेरे दिल के ...

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